राम मनोहर लोहिया के जीवन की सच्ची कहानी, गांधी जी के कहने पर छोड़ी थी सिगरेट

राम मनोहर लोहिया पहले नेता थे जिन्होंने कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान करते हुए कहा था कि जिंदा कौमें पांच साल तक इंतज़ार नहीं करतीं..राम मनोहर लोहिया ही थे जिन्होंने ये कहकर तहलका मचा दिया था कि नेहरू एक दिन में 25 हज़ार रुपये खर्च कर देते हैं..राम मनोहर लोहिया ही थे जिन्होंन भरी महफिल में इंदिरा गांधी को गूंगी गुड़िया कहा था..राम मनोहर लोहिया ही थे जिन्होंने कहा महिलाओं को सीता नहीं होना चाहिए, द्रौपदी बनना चाहिए..राजनीति की जानकारी रखने वाले किसी बच्चे से भी पूछ लीजिए तो वो बता देगा कि ‘जब जब लोहिया बोलता था, दिल्ली का तख़्ता डोलता था…

जब देश जवाहर लाल नेहरू को अपना सबसे बड़ा नेता मान रहा था, ये लोहिया ही थे जिन्होंने नेहरू को सवालों से घेरना शुरू किया था. नेहरू से उनकी तल्खी का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि उन्होंने एक बार ये भी कहा था कि बीमार देश के बीमार प्रधानमंत्री को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.

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1962 में लोहिया फूलपुर में जवाहर लाल नेहरू के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने चले गए.लोहिया जी कहते थे मैं पहाड़ से टकराने आया हूं. मैं जानता हूं कि पहाड़ से पार नहीं पा सकता लेकिन उसमें एक दरार भी कर दी तो चुनाव लड़ना सफल हो जाएगा..ऐसे सोच ऐसा डिटरमिनेशन..ऐसा जज्बा..ऐसा साहस उस जमाने में किसी नेता के भीतर होना किसी चमत्कार से कम नहीं था..आज के दौर में लोगों ने मोदी के आगे हथियार डाल दिए हैं लेकिन समाजवाद के जनक लोहिया लड़ने में भरोसा रखते थे..

1967 में राम मनोहर लोहिया इकलौते ऐसे शख़्स थे जिन्होंने कहा था कि कांग्रेस के दिन जाने वाले हैं और नए लोगों का जमाना आ रहा है. नौ राज्यों में कांग्रेस हार गई थी..आज की समाजवादी पार्टी लोहिया की विचारधार पर चलती है..मुलामय सिंह यादव और लोहिया का एक किस्सा याद आ रहा है..साल था 1963 फर्रूख़ाबाद सीट से लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव था मुलायम सिंह अपने साथियों के साथ प्रचार में जुटे थे. विधुना विधानसभा में लोहिया मुलायम से रास्ते में टकरा गए लोहिया ने मुलायम से पूछा कि प्रचार के दौरान क्या खाते हो, कहां रहते हो. मुलायम ने कहा कि लइया चना रखते हैं, लोग भी खिला देते हैं और जहां रात होती है उसी गांव में सो जाते हैं. तब लोहिया ने मुलायम  के कुर्ते की जेब में सौ रूपये का नोट रख दिया था…

लोहिया ने जर्मनी से डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की थी. ये कम ही लोग जानते होंगे कि वे अंग्रेजी, जर्मन, फ्रेंच, मराठी और बांग्ला धड़ल्ले से बोल सकते थे, लेकिन वे हमेशा हिंदी में बोलते थे, ताकि आम लोगों तक उनकी बात ज्यादा से ज्यादा पहुंचे..लोहिया ने चाहे आम लोगों के हितों की बात की हो, या समाज में महिलाओं को बराबरी देने की बात कही हो, ऐसे में लगता है कि वे भारतीय राजनीति के सबसे दूरदर्शी नेताओं में शामिल थे, लेकिन उनके अंदर एक आग हमेशा धधकती रहती थी.

लोहिया का निजी जीवन भी कम दिलचस्प नहीं था. लोहिया अपनी ज़िंदगी में किसी का दख़ल भी बर्दाश्त नहीं करते थे. हालांकि महात्मा गांधी ने उनके निजी जीवन में दख़ल देते हुए उनसे सिगरेट पीना छोड़ देने को कहा था. लोहिया ने बापू को कहा था कि सोच कर बताऊंगा. और तीन महीने के बाद उनसे कहा कि मैंने सिगरेट छोड़ दी.

लोहिया जीवन भर रमा मित्रा के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहे. रमा मित्रा दिल्ली के मिरांडा हाउस में प्रोफेसर रहीं. दोनों के एक दूसरे को लिखे पत्रों की किताब भी प्रकाशित हुई. “लोहिया ने अपने संबंध को कोई छिपाकर नहीं रखा था. लोग जानते थे, लेकिन उस दौर में निजता का सम्मान किया जाता था. लोहिया जी ने जीवन भर अपने संबंध को निभाया और रमा जी ने उसे आगे तक निभाया.”

50-60 के दशक में भारत में आम लोगों की राजनीति करने वाला कोई नेता अपने निजी जीवन में इतना बिंदास हो सकता है, इसकी कल्पना आज भी मुश्किल ही है. लोहिया महिलाओं को समान अधिकार दिए जाने की वकालत करते हुए कहते थे कि देश की सती-सीता की ज़रूरत नहीं बल्कि द्रौपदी की ज़रूरत है जो संघर्ष कर सके, सवाल पूछ सके.

राम मनोहर लोहिया ऐसे राजनेता थे जो अमरीका जा कर वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन से समाजवाद पर बहस कर सकते थे और मक़बूल फ़िदा हुसेन जैसे कलाकार की कला को भी राह दिखा सकते थे. दिल्ली के एक रेस्टोरेंट में लोहिया ने ही मक़बूल फ़िदा हुसेन को कहा था, “ये जो तुम बिरला और टाटा के ड्राइंग रूम में लटकने वाली तस्वीरों से घिरे हो, उससे बाहर निकलो. रामायण को पेंट करो.”

लोहिया की मौत भी कम विवादास्पद नहीं रही. उनका प्रोस्टेट ग्लैंड्स बढ़ गया था और इसका ऑपरेशन दिल्ली के सरकारी विलिंग्डन अस्पताल में किया गया था.

उनकी मौत के बारे में वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर ने अपनी ऑटो बायोग्राफी बियांड द लाइन्स में भी किया है. इसमें उन्होंने लिखा है, “मैं राम मनोहर लोहिया से अस्पताल में मिलने गया था. उन्होंने मुझसे कहा कुलदीप मैं इन डॉक्टरों के चलते मर रहा हूं.”

कुलदीप आगे लिखते हैं कि लोहिया की बात सच ही निकली क्योंकि डॉक्टरों ने उनकी बीमारी का गलत इलाज कर दिया था. उनकी मौत के बाद सरकार ने दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों के निरीक्षण हेतु एक समिति नियुक्त की थी. आज यही अस्पताल राम मनोहर लोहिया अस्पताल के रूप में जाना जाता है.

डॉ राम मनोहर लोहिया का जन्म 23 मार्च 1910 को उत्तर प्रदेश के शहर अम्बेडकर नगर में हुआ…डॉ राम मनोहर लोहिया के पिता एक अध्यापक थे…और सच्चे देशप्रेमी भी थे..राम मनोहर लोहिया जब 2/¹ साल के थे तब ही उनकी माँ का देहान्त हो गया था…उन्हें उनकी दादी ने पाला था…राम मनोहर लोहिया के पिता गांधी जी का अनुसरण करते थे..और जब भी वो गाँधी जी से मिलने के लिए जाते थे तो वो राम मनोहर लोहिया को अपने साथ ले जाया करते थे..जिस कारण ऊचें व्यक्त्तिव वाले गाँधी जी का उनपर काफी असर हुआ..

ram manohar lohiya wikipedia
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राम मनोहर लोहिया के जीवन के 1933 से जुड़ा एक वाक्या और याद आता है.. राम मनोहर लोहिया मद्रास पहुँचे तो रास्ते में उनका सामान जब्त कर लिया गया.. लिहाजा लोहिया समुद्री रास्ते से भारत आए..पैसे थे नहीं आगे किराए के पासे चाहिए थे..वो सीधे हिन्दु अखबार के दफ्तर पहुंचे…और वहां पर उन्होंने दो लेख लिखकर 25 रुपए कमाए..और फिर वो वहां से कलकत्ता चले गए….राम मनोहर लोहिया के गांधी से मिलने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है.. राम मनोहर लोहिया के पिता के मित्र सेठ जमुनालाल बजाज राम मनोहर लोहिया को गांधी जी के पास ले गए और कहा कि ये लड़का राजनीति करना चाहता है…17 मई 1934 को पटना में आचार्य नरेन्द्र देव की अध्यक्षता में देश के समाजवादी अन्जुमन ए इस्लामिया हॉल में लोग इकट्ठा हुए…जहां पर समाजवादी पार्टी की स्थापना का निर्णय लिया गया…यहां पर राम मनोहर लोहिया ने समाजवादी आंदोलन की रुपरेखा प्रस्तुत की…इसके बाद 150 समाजवादियों ने इकट्ठा होकर कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना की जिस पार्टी में राम मनोहर लोहिया को कार्याकारिणी सदस्य के रुप में चुना गया..

Created By_ Shilpi Ji