भारत चीन विवाद को लेकर आज बयान दे सकते हैं राजनाथ सिंह

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी विवाद को लेकर बयान दे सकते हैं राजनाथ सिंह इस मामले में राजनाथ सिंह का बयान अहम होगा, क्योंकि विपक्ष ने इस मुद्दे पर बहस की मांग की है। भारत के लद्दाख इलाके में चीन की सेना की हलिया घुसपैठ के कर्ताधर्ता खुद राष्ट्रपति शी चिनफिंग हैं। लेकिन भारतीय सेना ने जिस तरह से जवाब दिया है, उससे चीनी सेना अचंभित हो गयी है।

15 जून को गलवन घाटी में हुए हिंसक टकराव में जहां भारत के 20 सैनिक की जान गई, वहीं इस बात का जवाब देते हुए भारत ने चीन के कम से कम 43 सैनिक को मार गिराया। भारत के इस मुंहतोड़ जवाब से चीन का कदम फ्लाप साबित हुआ। चीन के राष्ट्रपति अब भविष्य में पैदा होने वाली चुनौतीयों के देखते हुए बचाव का रास्ता तलाश रहे हैं।

यह बात अमेरिका की प्रतिष्ठित पत्रिका न्यूजवीक ने अपने ताजा अंक में कही है। पत्रिका ने लिखा कि चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी इस समय बदलाव के दौर से गुजर रही है। ऐसे में चीन के लिए चुनौतियां बढ़ रही है। भारतीय सीमा पर चीन की सेना की विफलता पार्टी संगठन में चिंगफिंग के लिए चुनौतियां बढ़ रही है।

भारत ने पूर्वी लद्दाखि में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर निगरानी के स्तर को और बढ़ा दिया है। फारइटर विमानों की गर्जना भारतीय जवानों व लद्दाख के हौसला बढ़ा रही है। वहीं चीन के दिल डर पैदा हो रहा है। भारतीय वायुसेना भी चीन की हवाई गतिविधियों पर नजर रखने के साथ अपनी मारक क्षमता भी लगातार बढ़ा रही है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) का विफल होना चिनफिंग को दुष्परिणाम दे सकता है।

चीनी सेना के साथ तनातनी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी ने भी सुरक्षा बलों को एक साथ एकजुटता दिखाने को कहा। संसद में नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हमारी सेना के जवान बड़ी हिम्मत जज्बे और बुलंद हौसलों के साथ सीमा पर डटे हुए हैं। औऱ मातृभूमि की रक्षा के लिए खड़े हैं। साथ ही नरेंन्द्र मोदी ने ये भी कहा की ऐसा संदेश जाना बहुत जरुरी हो जाता है कि सेना के पीछे पूरा देश खड़ा है।

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