त्रियुगीनारायण – शिव और मां पर्वती के मंडप में मुकेश अंबानी के बेटे की शादी

मुकेश अंबानी के बेटे आकाश अंबानी की शादी की तैयारियां चल रही थीं और इन्हीं तैयारियों के बीच अंबानी के कुछ अधिकारी उत्तराखंड के त्रियुगीनारायण मंदिर में देखे गए..पता किया गया तो पता चला कि मुकेश अंबानी अपने बटे आकाश अंबानी की शादी उत्तराखंड के इस मंदिर में करना चाहते हैं…लंदन पेरिस जापान..दुनिया भर के बड़े बड़े होटल छोड़कर…दुनिया भर की चकाचौंध को छोड़कर मुकेश अंबानी ने अपने बेटे की शादी के लिए उत्तराखंड के गौरी कुंड के पास त्रियुगीनाराण गांव को चुना..

 

मुकेश अंबानी के इस फैसले ने सबको हैरत में डाल दिया था..लेकिन जब त्रियुगी गांव के बारे में पता किया गया तो पता चला कि मुकेश अंबानी ने उत्ताखंड के पहाड़ों पर बसे गांव त्रियुगीनारायण को ऐसे ही नहीं चुना है..त्रियुगीनाराण ये वो जगह हैं जहां शिव और पार्वती की शादी हुई थी..हम इस जगह के इतिहास के बारे में जितना जानते गए उतना हैरान होते गए…इस जगह की धार्मिक कहानी..और यहां के पौराणिक इतिहास के बारे में जानकर..वो सारे सवाल खत्म हो गए जो मन में उठ रहे थे कि मुकेश अंबानी जैसा देश का सबसे बड़ा उद्योगपति अपने बेटे की शादी छोटे से गांव में क्यों करने जा रहा हैं..

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  • त्रियुगीनारायण का इतिहास आपको हैरान कर देगा
  • यहां की पवित्र ज्वाला के बारे में जानकर आप हैरान हो जाएगे
  • मुकेश अंबानी पर त्रियुगीनारायण की महिमा है
  • त्रियुगीनारायण मंदिर का मुकेश अंबानी का पुराना नाता है

 

देश के जाने माने उद्योगपति मुकेश अंबानी के बेटे आकाश अंबानी की शादी..हीरा कारोबारी रसेल मेहता की बेटी श्लोका से होने वाली है..और ये शादी मुंबई की जगह उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के त्रियुगी नारायण मंदिर में होगी..शादी शाही है बड़े बड़े मेहमान आएंगे..तो तैयारियां भी बड़ी की जा रही हैं..मंदिर के पास की जगहों पर व्यवस्थाएं पुख्ता की जा रही हैं..

 

  • त्रियुगीनाराण को वेडिंग डेस्टिनेशन घोषित किया जा चुका है
  • इसी साल रावत सरकार ने वेडिंग डेस्टिनेशन घोषित किया
  • यहीं पर भगवान शिव की शादी माता पार्वती से हुई थी

जहां भगवान शिव ने माता पार्वती से किया था जिस मंदिर की मान्यता है कि जहां हुई शादी आज तक किसी भी हालत में टूटी नहीं..जिस मंदिर की पवित्र अग्नि आज कभी बुझी ही नहीं..उस अनंत अग्नी के सामने मुकेश अंबानी के बड़े बेटे आकाश अंबानी श्लोका के साथ सात फेरे लेंगे…यहां की मान्यताओं के बारे में जानने के बाद मुकेश अंबानी के फैसले पर किसी तरह की हैरानी नहीं रह गई..ये जो अग्नी आप मंदिर के भीतर जलती हुई देख रहे हैं..ये अग्नी सदियों से युगों से ऐसे ही जल रही है…इस अनंत अग्नि के बारे में कहते हैं कि ये अग्नी आज तक कभी बुझी ही नहीं और इसी अग्नि की खासियत के कारण इस जगह का नाम त्रियुगी नाराणय पड़ा..त्रियुगी मतलब..तीन युग..त्रियुगी नाराण मंदिर की अग्नी पिछले तीन युगों से ऐसे ही जल रही है..और कहते हैं जो भी इस अग्नी को साक्षी मानकर सात फेरे लेता है..उसका जीवन खुशियो से भर जाता है..धन संपदा सुख चैन अपने आप खिंचा चला आता है..

 

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केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के साथ ही मध्य हिमालय में स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर से मुकेश अंबानी के परिवार का पुराना रिश्ता है..चालीस साल पहले धीरू भाई अंबानी अपने दोनो बच्चों के साथ यानी अनिल अंबानी और मुकेश अंबानी के साथ त्रियुगीनारायण मंदिर आए थे और भगवान का आशीर्वाद लिया था..अंबानी परिवार मानता है उत्तराखंड के इस मंदिर में ऐसी शक्तियां जो उनके परिवार पर कृपा बरसाती हैं..और इसीलिए अब मुकेश अंबानी अपने बेटे की शादी यहां कराना चाहते हैं इसके लिये तैयारियां जोरों पर हैं…

त्रियुगीनारायण- अंबानी शादी
त्रियुगीनारायण मंदिर

रुद्रप्रयाग से तकरीबन 80 किमी आगे गौरीकुंड के पास त्रियुगीनारायण मंदिर है..रिलायंस ग्रुप के अधिकारी गढ़वाल मंडल विकास निगम के बंगलों का निरीक्षण कर रहे हैं..साथ ही यहां पर और कौन से साधन विकसित किये जा सकते हैं उस बारे में सोचा जा रहा है..पौराणिक कथाओं के मुताबिक माता पार्वती ने गौरी कुड के पास भगवान शिव को पाने की साधना की थी..भगवान शिव ने माता पार्वती से इसी ज्योति के सामने सात फेरे लिए थे..तब से अब तक यहां लाखो जोड़े शादी के बंधन में बंध चुके हैं..

 

लोगों का मानना है कि यहां शादी करने से दांपत्य जीवन में सुख का आगमन होता है..हिंदू पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक पार्वती पार्वतराज हिमावत की पुत्री थी..पार्वती के रूप में सती का पुनर्जन्म हुआ था..पार्वती ने शुरू में अपने सौंदर्य से शिव को रिझाना चाहा लेकिन वो सफल नहीं हो पाईं..फिर त्रियुगीनारायण से पांच किलोमीटर दूर गौरीकुंड में कठोर साधना से उन्होंने शिव का मन जीता..जो श्रद्धालु त्रियुगीनारायण जाते हैं वो गौरीकुंड के दर्शन भी करते हैं..

 

पौराणिक ग्रंथ बताते हैं कि शिव ने पार्वती के सामने केदारनाथ के रास्ते में पड़ने वाले गुप्तकाशी में विवाह का प्रस्ताव रखा था..इसके बाद दोनों का विवाह त्रियुगीनारायण गांव में मंदाकिनी सोन और गंगा के मिलन की जगह पर हुआ..ऐसा भी कहा जाता है कि त्रियुगीनारायण हिमावत की राजधानी थी..यहां शिव पार्वती के विवाह में विष्णु ने पार्वती के भाई के रूप में सभी रीति रिवाज निभाए थे..ब्रह्मा जी इस विवाह में पुरोहित बने थे..उस समय ज्ञषि मुनि इस गण भूत प्रेत सब इस शादी में शरीक हुए.. त्रियुगीनारायण मंदिर केदारनाथ और बद्रीनाथ से प्राचीन है कहते हैं कहते है त्रियुगीनारायण मंदिर त्रेता युग मे बना था जबकि केदारनाथ और बदरीनाथ द्वापर युग में स्थापित किए गए..ये भी मान्यता है कि इस जगह पर विष्णु भगवान ने वामन देवता का अवतार लिया था.. इतनी सारी खासियतों और इतने बड़े पौराणिक महत्व को देखते हुए मुकेश अंबानी अपने बेटे की शादी यहां कराने जा रहे हैं..दुनिया भर की सुख सुविधाएं एक तरफ