गोदी मीडिया(Godi Media)ने सारी हदें पार कीं..गाली बकने का सरकारी लाइसेंस : संपादकीय व्यंग्य

PRAGYA KA PANNA
PRAGYA KA PANNA

.दोस्तों गोदी मीडिया(Godi Media) ने नरक मचा दिया है..लाइसेंस लेकर गालियां बक रहे हैं..चीखने चिल्लाने मवाली बन जाने का ऐसा कौन सा जुनूनी दौर चल रहा है कि गोदी मीडिया की एंकर एंकराएं दोनो को गाली बकनी पड़ रही हैं..जो काम सड़क छाप मवाली भी मोहल्ले में अगल बगल दो बार देखकर करते हैं..वो गोदी मीडिया की एंकर एंकराएं..भारत सरकार से टीवी चैनल का लाइसेंस लेकर..लाइव शो में पूरे देश के सामने कर रहे हैं…देश का कानून अराजक तत्वों के लिए क्या है वो मैं नहीं जानती लेकिन देश के कानून को गोदी मीडिया की एंकर एंकराएं..

मीडिया में मेरे तमाम भाई बहन लोग काम करते हैं…अपना परिवार चलाते हैं..इसीलिए मैं गोदी मीडिया (Godi Media) की जाहिलियत पर कोई वीडियो नहीं बनाती..लेकिन मेरे दोस्तों मुझे माफ करना अगर मैं अब भी नहीं बोली तो मुझे अपने देश अपने उत्तर प्रदेश की बेटी होने पर लज्जा आने लगेगी..इस बेहुदगी पर मैं बोलूंगी..और साइंटीफिक और सामाजिक तरीके से बोलूंगी..ये मर्यादा पुरुषोत्तम का देश है.. ये मर्यादाओं का देश है..ये द्रौपदी का देश है जहां मर्यादा के लिए महाभारत हुई..ये कृष्ण का देश है..जहां 100वीं गाली बकने पर बुआ के लड़के शिशुपाल को भी माफ नहीं किया गया था..इस देश ने सम्मान बचाने के लिए सैकड़ों युद्ध किए हैं..इस देश में सम्मान के लिए महिलाओं ने जौहर किया है..इस देश की ही गोदी मीडिया में सम्मान बचाने के लिए संपादक नौकरियां तक छोड़ देते हैं..उस देश में ऐसे ढपोर शंख गोदी एंकर और एंकराएं..टीवी पर आपके बच्चों..आपकी माताओं बहनों..आपनी बेटियों के सामने..टीवी चैनल पर गालियां बकेंगे और सुनते रहेंगं..मैं आपको कुछ नहीं कहूंगी आपकी मर्जी है…सरकार सुन रही है..ब्रॉडकास्ट मिनिस्ट्री सुन रही है..देश का सभ्य समाज सुन रहा है..न्यूज को रेगुलेट करने वाले सुन रहे हैं..लेकिन कोई कानून नहीं है क्योंकि गोदी मीडिया के एंकर एंकराएं भी कानून क झांट भी नहीं समझते

सभ्य और पारिवारिक भाषा में बताऊं तो जननांगों के बाल जिसे गोदी मीडिया (Godi Media) का एंकर बीप कह रहा है..जिसे आपका गोदी मीडिया बीप के बाल बताता है..वो शरीर का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है.जननांगों की रक्षा करते हैं..लेकिन दिखाई नहीं देते हैं..कपड़ों से भी जननांगो की रक्षा करते हैं..जायादा गर्मी और जाड़े से भी जननांगों की रक्षा करते हैं..हानिकारक कणों को भी जननांगो तक नहीं पहुंचने देते..जैसे जननांगों के बाल वैसे सिर के बाल.. सिर के बाल कलर कराने के लिए नहीं होते..आंवले का तेल लगाने के लिए नहीं होते..फंकी लुक के लिए नहीं होते..तेरे नाम बनने के लिए नहीं होते..बाबा बनने के लिए नहीं होते..जुल्फों की छांव में डूब जाने के लिए नहीं होते..वो सिर की गर्मी को बैलेंस करने के लिए होते हैं..सिर को चोट से बचाने के लिए होते हैं..सिर के बाल दिखाई देते हैं..तो जुल्फें कहती हैं..और जननांगों के बाल दिखाई नहीं देते हैं..तो वो बीप बीप के बाल रहलाते हैं…इस देश में जो दिखाई देते हैं..जिनकी फोटोओं लगती हैं..जो सड़क चौराहों दीवारों पर मुस्कुराते हैं वो सिर के बाल हैं..और जो दिखाई नहीं देते..जो असल में महत्वपूर्ण अंगों की रक्षा कर रहे हैं..वो गोदी मीडिया के मुतबिक बीप बीप के बाल हैं..

मैं पत्रकार हूं लेकिन गोदी मीडिया (Godi Media) के अलाव हर चीज को थोड़ा थोड़ा समझती हूं..जानने की कोशिश करती हूं…इसलिए आपको भी समझाना चाहती हूं…शरीर में जितने भी महत्वपूर्ण अंग हैं..उन अंगों को प्रोटेक्शन देने के लिए प्रकृति ने उन उन जगहों पर बाल जरूर दिए हैं..दिखाई देने के हिसाब से कुछ बाल सम्मान पाते हैं..और कुछ को गोदी मीडिया अपनी सरकार से लाइसेंस लेकर गाली बकता है..बाल बाल हैं बालों का इसमें कोई दोष नहीं है..इंसान ही कहीं के बाल हटाना चाहता है और कहीं लगवाना चाहता है…आंखो की हिफाजत के लिए पलके होती हैं..और हीट मेंटेंन करने के लिए कड़ों को रोकने के लिए भौहें या आईब्रोज होती हैं..नाक के आंदर बाल और बाहर मूंझें होती हूं..जिससे हवा को फिल्टर किया जा सके..पुरुषोंको दाढ़ी होती है..जिससे जबड़े की गर्मी को मेंटेन किया जा सके..और चोट से बचाया जा सके..फिर बगल के बाल…छाती के बाल..जननांगों पर बाल..टांगों पर बाल..सबकी अपनी इंपॉर्टेंस है लेकिन सबसे ज्यादा अपमान सहते हैं जननांगों को बाल क्यों क्योंकि वो दिखाई नहीं देते..भारत के कानून की तरह..नए दौर के भारत में सम्मान के लिए दिखई देते रहना बहुत जरूरी है..जो बाल हेडलाइन में रहेंगे वही सम्मान पाएंगे..बाकी…बीप बीप के बाल कहलाएंगे

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