दुष्प्रभाव होने के कारण रोका गया कोरोना वैक्सीन का ट्रायल

कोरोना महामारी से बचने के लिए किया गया हर प्रयास विफल रहा है। कोरोना वायरस को खत्म करने के लिए जो उम्मीद थी ऑक्‍सफर्ड की वैक्‍सीन AZD1222 के तीसरे और अंतिम चरण के ट्रायल को रोक दिया गया है। और बताया जा रहा है कि ब्रिटेन में एक व्यक्ति को कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाई गयी थी। और उसके शरीर में गंभीर दुष्प्रभाव देखते हुए वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल को रोक दिया गया।

यह वैक्सीन सबके लिए उम्मीद की किरण बन गयी थी, औऱ भारत में भी इस वैक्सीन का ट्रायल शुरु हो गया था। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है मरीज में किस तरह का दुष्प्रभाव हुआ है। लेकिन यह बताया जा रहा है कि व्यक्ति के जल्द ठीक होने की संभावना है। वैक्सीन के ट्रायल के दौरान उसे रोका जाना कोई नयी बात नहीं है। लेकिन इससे दुनिया भर में कोरोना वैक्सीन बनने वाले प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनिका में बनने वाली यह वैक्‍सीन रेस में सबसे आगे चल रही थी।

ब्रिटेन के स्वास्थय मंत्री ने यह सोचा था कि 2021 के शुरुआती महीनों में यह वैक्सीन आ जाएगी। भारत के साथ-साथ दुनिया भर से इस वैक्सीन के लिए आर्डर आना शुरु हो गए थे। दुनियाभर में कोरोना वायरस के कारण 8,94,000 लोग मारे गए और करोड़ो लोग बेरोजगार हो गए हैं।

एस्ट्राजेनिका के प्रवक्ता ने बताया है कि यह एक सामान्य कार्यवाही है और अब मरीजों के बिमार होने का कारणों का पता लगाया जाता है। प्रवक्ता ने कहा कि ट्रायल के दौरान बिमार होने का खतरा बना रहता है लेकिन इसकी स्वतंत्र तरीके से इसकी जांच होना जरुरी है। बहुत तेजी से इस मामले की जांच हो रही है। जिससे ट्रायल की समयसीमा पर कोई असर ना पड़े।

ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिक वैक्सीन के पूरी तरह सफल होने को लेकर आश्वस्त हैं, बल्कि उन्हें 80% तक भरोसा है कि सितंबर तक वैक्सीन आ जाएगी। कोरोना वैक्सीन जो है ChAdOx1 वायरस से बनी जो सामान्य सर्दी पैदा करने वाले वायरस का कमजोर रूप है। जेनेटिकली इसे बदला गया है इससे इंसानों में इंफेक्शन नहीं होता है।

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