कृष्ण पहले ऐसे भगवान थे जो युद्धभूमि से भाग गए थे : जन्माष्टमी विशेष

108 नाम वाले कृष्ण यवन देश के मुस्लिम योद्धा से डर गए थे..ये कितना सही है..

कृष्ण पहले ऐसे भगवान थे जो युद्धभूमि से भाग गए थे

KRISHNA JANMASHTMI- 21वीं सदी में युवा पीढ़ी के रोल मॉडल भगवान कृष्ण का HAPPY BIRTHDAY है, माने कि जन्माष्टमी है. 33 करोड़ देवी देवताओं में सबसे बिंदास भगवान वासुदेव श्री कृष्ण सबसे शानदार भाई थे. सबसे जानदार मित्र थे, उनकी बातें ऐसी थीं कि लंगड़े भी हथियार उठा लें. उनका प्रेम ऐसा था कि गोपियां सुधबुध खो देती थीं. उन्होंने चोरी भी की, बेवफाई भी की. राजा भी थे. गाय चराने वाले भी थे. संगीत प्रेमी भी थे. और खतरनाक सुदर्शन चक्र प्रेमी भी. वो बांसुरी भी बजाते थे और दुश्मनों की पुंगी भी. जब उन्होंने Term & Conditions यानि नीति और नियमों की बात की तो गीता जैसे ग्रंथ की रचना हुई. कर्म को प्रधान मानने वाले कृष्ण..

यदुकुल श्रीरोमणि भगवान कृष्ण ने परिस्थितियों के हिसाब से ढलना भी बताया. और सच्चाई के लिए अपनों के खिलाफ खड़े होना भी सिखाया. कृष्ण आज जनरेशन के भगवान हैं. आज की जनरेशन मानती है कि आगे जाने के लिए थोड़ा पीछे जाने में कोई बुराई नहीं है. वैसा ही भगवान कृष्ण ने किया था. वो तो युद्ध से ही भाग गए थे. और नाम पड़ा रणछोड़

कालयवन के अंत के लिए भागना जरूरी था

यवन देश का काल यवन नाम का एक राजा था. भगवान शंकर ने उसे वरदान दिया था कि उसे ना तो चंद्रवंशी मार पाएंगे ना ही सूर्यवंशी उसका कुछ बिगाड़ पाएंगे. ना हथियार उसको खरोच पहुंचा पाएंगे. ना ही बल से उसे हराया जा सकता है. और कालयवन ने खुद को अजेय समझ लिया था. किसी बहादुर योद्धा से युद्ध के लिए उसकी बाजुएं मचल रही थीं. जरासंध ने कालयव से भगवान कृष्ण को मारने के लिए मना लिया. कालयवन ने बिना किसी शत्रुता के मथुरा पर आक्रमण कर दिया.

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भगवान कृष्ण जानते थे कि कालयवन को मारा नहीं जा सकता. उनका सुरदर्शन कालयवन का कुछ नहीं बिगाड़ सकता. इसलिए रणभूमि से भगवान कृष्ण भाग खड़े हुए. और एक गुफा में जा पहुंचे जहां पर राक्षसों से लड़ाई करके राजा मुचकुंद त्रेतायुग से सोए हुए थे. राजा मुचकुंद ने दानवों को हराने में अपना सबकुछ खो दिया था. और बहुत थक गए थे इसलिए इंद्र ने उनको विश्राम करने का वरदान देने के साथ ही कहा कि जो भी इंसान तुमको सोते से जगाएगा वो जलकर खाक हो जाएगा.

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भगवान कृष्ण काल यवन को भगाते भगाते उस गुफा तक ले गए जहां पर राजा मुचकुंद सोए हुए थे. गुफा में भगवान कृष्ण ने राजा मुचकुंद के ऊपर अपना पीतांबर डाल दिया. कालयवन को लगा उससे डरकर भगवान कृष्ण अंधेरी गुफा में सो गए हैं. कालयवन ने जैसे ही लात मारकर त्रेता युग से सोए हुए राजा मुचकुंद को उठाया. जैसे ही राजा मुचकुंद की आंख खुली. कालयवन जलकर खाक हो गया.

साम, दाम, दंड, भेद के आविष्कारक कृष्ण की चालाकी के कई किस्से हैं. कृष्ण होना आसान नहीं है. आसान नहीं है राधा जैसी प्रेमिका को छोड़कर कर्म को सब कुछ मान लेना. जेल में जन्म लेना. दुष्टों का नाश करना. सत्य का साथ देना. लेकिन वो कृष्ण ही हैं जो ये बताते हैं कि कर्म करो फल की इच्छा ना करो.

 

 

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