BJP के लिए आयुष्मान योजना का मतलब..फिर से 5 साल लाल किले पर कब्जा

  • आयुष्मान योजना ठीक वैसे ही बहुत अच्छी है जैसे UPA2 के कार्यकाल में खाद्य सुरक्षा गारंटी कानून था..
  • हैं दोनों बहुत अच्छे लेकिन दोनों योजनाएं दोनों सरकारों ने सरकार के अंतिम दिनों में लॉन्च कीं.
  • मनेरेगा की तरह कांग्रेस खाद्य सुरक्षा गारंटी कानून का फायदा नहीं पाई. क्या मोदी का आयुष्मान से भला होगा
  • क्या आयुष्मान बीजेपी को 5 साल के लिए फिर से अभयदान दे पाएगा ? पढ़िए लाल किले का मतलब…
आयुष्मान भारत ulta chasma uc
फोटो सौजन्य- jk24x7news.com

कांग्रेस और बीजेपी ने सरकार के आखिरी दिनों में सेम गलती की है

लाल किले से अपने आखिरी भाषण में आयुष्मान भारत योजना का ऐलान कर दिया है…इस ऐलान को समझने से पहले चुनाव से पहले होने वाली फ्लैगशिप योजनाओं की राजनीति को समझना होगा. फ्लैगशिप योजना मतलब एक ऐसी योजना जो आपको हिट कर दे. जैसे कांग्रेस ने 2004 से 2009 के बीच 2005 के सितंबर में यानी UPA1 के कार्यकाल में लॉन्च की मनरेगा योजना

 

योजना जिसमें साल में 100 दिन का रोजगार सभी के लिए पक्का हुआ कहा गया कि अगर सरकार नौकरी नहीं दे पाएगी तो फिर बेरोजगारी भत्ता सरकार देगी. और 120 रूपए रोज के हिसाब से दिए जाने लगे. नतीजा ये हुआ कि 5 करोड़ लोगों को सीधे बैठे बिठाए अपने गांव में काम मिल गया और ताल तलैया खोदे जाने लगे..

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इसी मनरेगा के दम पर कांग्रेस ने फिर से सरकार बना ली. 2009 में फिर से मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बन गए. लेकिन दूसरे कार्यकाल में कांग्रेस पर घपले घोटालों का आरोप लगा. लेकिन दूसरे कार्यकाल में भी कांग्रेस एक फ्लैगशिप योजना लाने का दांव चल दिया. वो थी फूड गारंटी कानून यानी खाद्य सुरक्षा गारंटी कानून. लेकिन कांग्रेस ने देर कर दी थी.

 

योजना जमीन पर पूरी तरह से अमल में नहीं आ पाई और 2014 के चुनाव आ गए..नतीजा क्या हुआ आप जानते हैं..अगर कांग्रेस का खाद्य सुरक्षा कानून उस समय फायद दे गया होता तो भारत की आधी आबादी यानी लगभग 50 करोड़ के करीब लोग लाभ लेते. यानी लगभग 47 प्रतिशत लोग. लेकिन ये हो नहीं पाया यूपीए टू की दूसरी फ्लैगशिप योजना फेल हुई. और मोदी सरकार आ गई..

 

सरकार के अंतिम दिनों में बीजेपी से यहां चूक हुई है

अब बात मोदी की मोदी सरकार के पास योजनाओं के का अंबार है. लगभग 400 स्कीम हैं जो लॉन्च की गईं, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, उज्जवला योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ. स्मार्ट सिटी कहीं दिखी नहीं है. मुद्रा योजना में कई शिकायतें हैं. धनजन पर सवाल हैं. हर घर शौचालय पहले से चल रही थी.

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स्वच्छ भारत अभियान एक अच्छी आदत है.डायरेक्ट लाभप्रद योजना नहीं है. मेक इन इंडिया के तहत सैंमसंग नोएडा में स्थापित की गई है..हालांकि उसका शिलान्यास अखिलेश सरकार में ही हो गया था. विदेशी निवेश एक्का-दुक्का छोड़कर ज्यादा आया नहीं है. महिला सुरक्षा के नाम पर तीन तलाक के मामले में ही रूचि दिखाई गई है.बाकी बड़ी बड़ी योजनाएं जिनके नाम तक गरीब नहीं जानते. लेकिन इन सब योजनाओं में ऐसी कोई योजना नहीं है जो बीजेपी की फ्लैगशिप योजना बन सके.

उज्जवला योजना को बीजेपी जोर शोर से उठा सकती है. 5 करोड़ लोगों तक रसोई गैस पहुंचाने का लक्ष्य था. लगभग 1 करोड़ से ज्यादा लोगों तक सिलेंडर पहुंच चुके हैं. लेकिन दिक्कद दोबारा सिलेंडर भरवाने की है. कहते हैं 6 रफिलिंग तक सब्सिडी मिल सकती है.

आयुष्मान योजना लॉन्च होकर लागू होने तक चुनावी शोर शुरू हो जाएगा

चुनाव से पहले बीजेपी को एक फ्लैगशिप योजना की जरूरत है जिसके दम पर चुनाव लड़ा जा सके. लोगों को काम बताया जा सकें वो योजना आयुष्मान योजना बन सकती है आयुष्मान यानी गरीब परिवारों को 5 लाख तक का हेल्थ बीमा. यानी गरीब आदमी बीमार होने पर 5 लाख रूपए तक का इलाज अस्पताल में मुफ्त करा सकता है. लेकिन इस योजना का अभी ऐलन हुआ है. कहते हैं सितंबर से अमल में आएगी. इस योजना से भी करीब

 10 करोड़ परिवारों के 50 करोड़ लोगों को फायदा होगा.

अब दिक्कत ये भी है कि जहां सरकारी अस्पताल आबादी के मुकाबले कम हैं वहां गरीब आदमी का बीमा हो भी जाएगा तो कितना फायदा होगा. प्रइवेट अस्पताल दो दिन में ही 5 लाख का बिल बना देते हैं. आयुष्मान योजना ठीक है. देश की करीब 30 फीसदी आबादी गरीब है. अगर योजना कारगर ढंग से लागू हो जाती है तो देश की 30 प्रतिशत जनता को बीजेपी प्रभावित कर सकती है. एक अनुमान के मुताबिक 10 करोड़ परिवारों के 50 करोड़ लोग प्रभावित हो सकते हैं.

2014 में बीजेपी ने देश के 31 फीसदी वोट लेकर सरकार बनाई थी. और आयुष्मान योजना से 30 प्रतिशत आबादी खुश हो सकती है. लेकिन दिक्कत ये हो सकती है यूपीए 2 की खाद्य सुरक्षा गारंटी कानून की तरह ये दमदार योजना भी सरकार के कार्यकाल के आखिर में लॉन्च होने वाली है. जिसका प्रत्यक्ष लाभ बीजेपी को मिल पाएगा इमसें मुश्किल दिखाई दे रही है.

मंदिर बना नहीं है. स्मार्ट सिट बनी नहीं है. काला धन आया नहीं है. सहारा हिंदुत्व का ही है. या फिर राम मंदिर बना दिए जाए जिससे 2014 वाली लहर दोबारा उठ सके.

((((लेख में आंकड़े लेखक के अपने स्वतंत्र विचार हैं. ये लेख लखनऊ यूनिवर्सिटी के पॉलीटिकल साइंस के प्रोफेसर की तरह से है..उनकी राय से ULTACHASMAUC.COM सहमत या असहमत नहीं है )))))