crossorigin="anonymous"> अटल की अस्थि कलश यात्रा 'इलेक्शन धातु' की बनी है. 2019 में आएगी सहानुभूति की सूनामी - Ulta Chasma Uc

अटल की अस्थि कलश यात्रा ‘इलेक्शन धातु’ की बनी है. 2019 में आएगी सहानुभूति की सूनामी

फोटो साभार- Firstpost Hindi
अटल बिहारी वाजपेयी बीजेपी के लिए वो वज्र साबित होंगे जो इंद्र देव को कभी हारने नहीं देता था. वो वज्र दधीचि की हड्डियों से बना था और अटल की अस्थियों का विसर्जन  वाला कलश ‘इलेक्शन धातु’ का बना है. ये कलश कम से कम इस बार यानी 2019 में अजेय साबित होगा. जब तक अटल की अस्थि कलश यात्रा बीजेपी के साथ है तब तक बीजेपी को इंद्र की तरह ही कोई नहीं हरा सकता..क्योंकि इसमें वाजपेयी जैसे महान नेता की जीवन भर की तपस्या है. जो इस चुनाव में बीजेपी के लिए वरदान साबित होगी.
नेहरू, शास्त्री और अटल की आस्थियाों में समानता
1964 में लाल बहादुरशास्त्री को भारत का प्रधानमंत्री बनाया गया और 1965 में पाकिस्तान से जंग छिड़ गई. भारत सूखे से गुजर रहा था. शास्त्री जी ने ”जय जवान जय किसान” का नारा देते हुए एक दिन का व्रत रखने की अपील की. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी तो इस नारे में “जय विज्ञान” और जोड़ दिया.
नेहरू की अस्थियां मथुरा में यमुना नदी में विश्राम घाट पर विसर्जित की गईं. लाल बहादुर शास्त्री ने कहा था कि मेरी अस्थियां जहाज से इस देश के खेतों में बिखेर देना ताकि मैं किसानों के बीच रह सकूं. अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियां आधिकारिक तौर पर 2 किमी की यात्रा निकालकर हरिद्वार में गंगा में विसर्जित कर दी गईं.
अटल जी की अस्थियां अलख जगाएंगी
इसके बाद शुरू होती है आगे की कहानी. बीजेपी देश में सभी राज्यों की हर नदी में अटल जी की अस्थियां विसर्जित करेगी. अब तक तो रस्में थीं. भावनाएं थीं. लेकिन इसके आगे भावनाएं भुनाई जाएंगी. अब  बीजेपी का 2019 का मार्ग अटल प्रशस्त्र करेंगे. वैसे इसमें कोई बुराई नहीं है. अटल जी सबके चहेते थे. हर जिले में हर ब्लॉक में हर पंचायत में हर ग्राम सभा में हर पोलिंग बूथ तक अस्थि कलश यात्रा निकालना कोई बुराई की बात नहीं है. अटल जी की कहानी सबको जाननी चाहिए
कांग्रेस अटल की सहानुभूति लहर से डर गई है
अटल जी सबके थे. जवाहर लाल नेहरू की भी खुले कंठ से तारीफ करते थे. कांग्रेस की अच्छाई बुराई दोनों बीच सदन में खड़े होकर डंके की चोट पर बताते थे. कांग्रेस चाहे तो वो भी अटल जी की याद में कार्यक्रम कर सकती है. कांग्रेस कहती है कि बीजेपी अटल की अस्थि कलश यात्रा के नाम पर 2019 की चुनावी राजनीति का लक्ष्य साध रही है. तो सवाल ये भी उठता है कि कांग्रेस के पास ऐसा करने के मौके कई बार आए.
कांग्रेस ने भी इंदिरा गांधी की मृत्यू पर, राजीव गांधी की मृत्यू पर. महात्मा गांधी की मृत्यू पर. नेहरू की मृत्यू पर. सहानुभूति खूब बटोरी है. बीजेपी को अगर पहली बार अटल की अस्थि कलश यात्रा हर चुनावी राज्य के कोने कोने से निकालना चाहती है तो बुराई क्या है. जिन लोगों को अटल जी को श्रद्धांजलि देने का सौभाग्य प्राप्त नहीं किया था. उनको मौका मिलेगा और बीजेपी को बातचीत का बहाना.
((लेखक लखनऊ यूनिवर्सिटी के पॉलिटिक्स विज्ञान के प्रोफेसर हैं. लेख में विचार उनके व्यक्तिगत हैं. उनके विचारों का उनके आंकड़ों का ultachasmauc.com समर्थन या विरोध नहीं करता. किसी भी तरह की आपत्ति के लिए ultachasmauc.com जिम्मेदार नहीं है))