अखिलेश के असली गुरू से मिलिए, गुरू जी ने 3 क्लास ड्रॉप क्यों करवा दी..

गुरू को लड़की वाले देखने आए थे..लेकिन गुरू अपने शिष्य का दाखिला कराने के लिए शहर से बाहर था..गुरू जी अपने शिष्य को पढ़ाते शिष्य को समझ में नहीं आता..गुरू जी को गुस्सा आता..कान पकड़ने के लिए हाथ आगे बढ़ाते शिष्य मुस्कुरा देता..गुरू जी का गुस्सा गायब हो जाता..जी अखिलेश यादव के गुरू के बारे में बात हो रही है..तमाम लोग अखिलेश यादव के गुरू के बारे में 100 तरीके के अनुमान लगाते हैं..कोई लोहिया को उनका गुरू बताता है कोई जनेश्वर मिश्रा को लेकिन ये सब उनके वैचारिक गुरू हैं..जिन्होंने जीवन जीना सिखाया..सही गलत का भेद बताया..उंगली पकड़कर प्रगति के पथ की तरफ लेकर गए वो उसली गुरू कोई और हैं..उनका नाम है अवध किशोर वाजपेयी..99 प्रतिशत लोग अखिलेश यादव के असल गुरु के बारे में नहीं जानते..आज हम आपको अखिलेश यादव के गुरू के बारे में बताएंगे..

 

अखिलेश यादव के गुरू चाहते थे कि उनका शिष्य अखिलेश पढ़लिखकर आर्मी का बड़ा अफसर बने क्योंकि इटवा लगा हुआ था चंबल के बीह़ड़ों से गुरू चाहते थे मेरे शिष्य आर्मी का बड़का अफसर बने.अखिलेश भी अपने गुरू के दिखाए रास्ते पर चलते थे.. अखिलेश यादव अगर राजनीति में न होते तो आज सेना के जनरल होते..अखिलेश यादव को कक्षा तीन से इंटरमीडिएट तक पढ़ाने वाले उनके गुरु अवध किशोर बाजपेई ये बात खुद बताते हैं..अखिलेश के गुर अवध किशोर ने बताया कि कक्षा 6 में अखिलेश का चयन धौलपुर सैनिक स्कूल में हो गया था..बाद में राजनीतिक परिस्थितियां ऐसी बन गईं कि अखिलेश को राजनीति में आना पड़ा..लेकिन आज बात अखिलेश की राजनीति की नहीं उनके गुरू के बारे में होगी..वो रहते कहां हैं..वो अब क्या करते हैं..उनका जीवन कैसे चल रहा है..अखिलेश ने उनके लिए क्या क्या किया है…और उनके गुरू ने अखिलश से क्या गुरू दक्षिणा मांगी थी..ये सब आज आपको बताएंगे..अखिलेश यादव के गुरु अवध किशोर बाजपेई इटवा के पुरबिया टोला में पड़ने वाले केके इंटर कॉलेज से अंग्रेजी के प्रवक्ता पद से रिटायर हुए हैं..ये इटावा के ही.. सिविल लाइन कचहरी रोड के पुरानी दीवानी के पास रहते हैं..अखिलेश यादव को पढ़ाने की जिम्मेदारी जब गुरू अवध किशोर वाजपेयी को दी गई तो साल था 1981 और अखिलेश की उम्र रही होगी यही कोई 10 साल..अखिलेश को दूसरे बच्चों की तरह खेलना खूब पसंद था..और चीजें बहुत जल्दी कंठस्थ कर लेते थे..ये बात उन दिनों की है जब अखिलेश सेंट मेरी में तीसरी क्लास में पढ़ते थे..दो घंटे की ट्यूशन गुरू अवध बिहारी वाजपेयी देते थे..और नतीजा ये हुआ कि अखिलेश यादव की होशियारी और कुशाग्र बुद्धि को देखते हुए उनका एडमिशन धौलपुर मिलिट्री स्कूल में सीधे कक्षा 6 में हो गया. अखिलेश के गुरू की मेहनत के दो फायदे हुए एक तो.इवाटा के असुरक्षित माहौल से बालक अखिलेश को बाहर निकाल दिया गया..दसरा अखिलेश के गुरू अखिलेश को सेना में भेजना चाहते थे उसकी पहली सीढञी पर पांव रखा जा चुका था..

उस समय का गजब वाक्या ये था कि जब अखिलेश का एडमिशन धौलपुर में हो रहा था उसी दिन अखिलेश के गूरू को लड़की वाले देखने आने वाले थे..जब वो एडमिशन कराकर वापस आए उसके बाद उन्होंने लड़की देखी और शादी की.. मुलायम सिहं यदव उस दौर में राजनीति में संघर्ष कर रहे थे..तो स्कूल से आने वाली चिट्ठी पत्रियों का जवाब भी गार्जियन बनकर अखिलेश यादव के गुरू ही देते थे..धौलपुर से जब भी अखिलेश इटवा आते तो उनकी पढ़ाई लिखाई और कोर्स पूरा कराने की जिम्मेदारी गुरू जी की ही थी.. अवध किशोर बाजपेई जी बताते हैं कि अखिलेश में आत्मविश्वास की कभी कमी नहीं रही, न बचपन में और न अब..अखिलेश के गुरू कहते हैं कि गुरूदक्षिणा के बारे उन्होंने कभी सोचा नहीं लेकिन अखिलेश यादव आज जो कर रहे हैं..सरकार में ना रहकर भी गरीबों मजलूमों..की मदद कर रहे हैं वही मेरी गुरू दक्षिणा है..सरकारें आती जाती रहती हैं..लेकिन उन्होंने अखिलश के भीतर जो संस्कार भरे थे वो आज भी वैसे ही हैं यही उनकी गुरू दक्षिणा है..अखिलेश यादव अपने गुरू को हर ब़ड़े मौके पर फोन करना नहीं भूलते..

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